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सोमवार, 25 जून 2012

साबुन-पानी ज़िन्दाबाद ! (Sabun pani zindabad by Korney Ivanovich Chukovsky)



...
वह पागल, स्पंज मुस्टंडा.
मुझे डराये, जैसे डंडा,
उस से डर कर भाग चला
पर वह जालिम नहीं टला,
मैं दायें, तो वह दायें
मैं बायें, तो वह बायें,
लांघ गया मैं बाड़ मगर
झपटा वह फिर भी मुझ पर, 
उसी समय घड़ियाल मित्र
वह मेरा प्यारा-प्यारा,
बच्चों के संग पड़ा दिखाई
उसने मुझे उबारा,
उसने झट स्पंज को निगला
वह हलवे-सा मुंह में पिघला,
फिर वह मुझे देख चिल्लाया
पैर पटकता भागा आया,
"जाओ, फ़ौरन, जाओ घर
                         वह बोला !
मुंह को धोओ मल मल कर
                         वह बोला !
पीटूंगा, खा जाऊंगा
                         वह बोला !"
भाग चला मैं तब सरपट
वापस आया घर झटपट,
                         मल मल साबुन
                         मल मल साबुन
बहुत देर तन साफ़ किया, 
                         धब्बे धोये 
                         स्याही धोयी
मुंह का मैल उतार दिया.
अब पतलून भागता आया
"पहनो मुझको," वह चिल्लाया,
तभी समोसा बोला आकर.
"मुंह में रख लो, मुझे उठाकर,"
नारंगी भी दौड़ी आई
सीधे मुंह के बीच समाई.
लौटी अब पुस्तक भी मेरी
कापी भी आई वापस,
गणित, व्याकरण झूमे खुश हो
नाच उठे दोनों बरबस.
इसी समय वह बड़ी चिलमची
अन्य सभी की जो सरदार,
'धो लो, धो लो' नाम है जिसका
जिसके बल का वार न पार,
भागी आई मुझे चूमती,
नाच नाचती और झूमती, बोली : "तुम कितने सुन्दर हो
अब तुम मुझे बहुत प्यारे हो ;
सब की आंखों के तारे हो."
हर दिन, हर दिन सुबह-शाम को 
तन की करो सफ़ाई, 
वरना सभी दूर भागेंगे
निश्चय मानो भाई.
...
खुशबू वाला प्यारा-प्यारा
साबुन जिंदाबाद !
फूला-फूला नर्म तौलिया 
                         वह भी ज़िंदाबाद !
ज़िन्दाबाद रहे दांतों का बढ़िया 
                                       मंजन,
ज़िन्दाबाद रहे आंखों का बढ़िया अंजन.
...
नल-टोंटी के नीचे बैठें
घर में स्नान करें
पानी ज़िन्दाबाद कि उससे
तन का ताप हरें.

                      कवि - कोर्नेई चुकोव्स्की (1882 - 1969)
                      रूसी से अनुवाद - मदनलाल 'मधु' 
                      संग्रह - साबुन-पानी ज़िन्दाबाद !
                      प्रकाशक - रादुगा प्रकाशन, मास्को

1 टिप्पणी:

  1. मजा आ गया पढ़ गया अपना बचपन याद आ गया. क्यूं छोड़ा हमने ये सब पढाना

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