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गुरुवार, 28 जून 2012

ध्यान यात्रा (Dhyan Yatra by Nasir Kazmi)



    इस दुनिया में अपना क्या है
    कहने को सब कुछ अपना है

    यूँ तो शबनम भी है दरिया
    यूँ तो दरिया भी है प्यासा

    यूँ तो हीरा भी है कंकर
    यूँ तो मिट्टी भी सोना है

    मुँह देखी की बातें हैं सब
    किसने किसको याद किया है

    तेरे साथ गयी वो रौनक
    अब इस शहर में क्या रक्खा है

    बात न कर, सूरत तो दिखा दे
    तेरा इसमें क्या जाता है

    ध्यान के आतिशदान में 'नासिर'
    बुझे दिनों का ढेर पडा है 


                         शायर - नासिर कामी
                         संग्रह - ध्यान यात्रा 
                         सम्पादक - शरद दत्त, बलराज मेनरा 
                         प्रकाशक - सारांश प्रकाशन, दिल्ली, 1994

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