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गुरुवार, 31 जनवरी 2013

धूप का गीत (Dhoop ka geet by Kedarnath Agrawal)

धूप धरा पर उतरी
जैसे शिव के जटाजूट पर
नभ से गंगा उतरी l
धरती भी कोलाहल करती
तम से ऊपर उभरी
धूप धरा पर बिखरी l

बरसी रवि की गगरी,
जैसे ब्रज की बीच गली में
बरसी गोरस गगरी l
फूल-कटोरों-सी मुसकाती
रूप भरी है नगरी
धूप धरा पर निखरी l

कवि - केदारनाथ अग्रवाल 
संग्रह - पदचिह्न 
संपादक - नंदकिशोर नवल, संजय शांडिल्य 
प्रकाशक - दानिश बुक्स, दिल्ली, 2006

1 टिप्पणी:

  1. kitni sundar..dhup ki nikhaar..
    ..aur mein yahan samajh nahi pa rahi ki mujhe D3 deficiency kaise ho gayi?!
    Pata chala ki Hindustaani aurat ke libaas ki vajah se, jo tan ko lagbhag pura dhakne ka rivaaz hai, hum ko surya se milta hua vitamin D paryapt matra mein nahi mil pata!! KYA YEH SACH HO SAKTA HAI??

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