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सोमवार, 11 मार्च 2013

अगर कहीं मैं तोता होता (Agar kahin main tota hota by Raghuvir Sahai)

          
          अगर कहीं मैं तोता होता 

तोता होता तो क्या होता ?
          तोता होता l 
होता तो फिर ?
          होता, 'फिर' क्या ?
          होता क्या ? मैं तोता होता l 
          तोता तोता तोता तोता 
          तो तो तो तो ता ता ता ता 
          बोल पट्ठे सीता राम 



कवि - रघुवीर सहाय  
संकलन - रघुवीर सहाय : प्रतिनिधि कविताएँ  
संपादक - सुरेश शर्मा  
प्रकाशक - राजकमल पेपरबैक्स, दिल्ली, पहला संस्करण - 1994

1 टिप्पणी:

  1. bus ek ajab si gudgudi hui yeh padhkar. kaise log itni badi baatein itne kam our spashta shabdo mein kah dete hain

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