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गुरुवार, 13 जून 2013

छींक (Chheenk by Uday Prakash)


ज़िल्लेइलाही 
शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान 
आफ़ताब-ए-वक़्त 
हुज़ूर-ए-आला !

परवरदिगार 
जहाँपनाह !

क्षमा करें मेरे पाप l 

मगर ये सच है 
मेरी क़िस्मत के आक़ा,
मेरे ख़ून और पसीने के क़तरे-क़तरे
के हक़दार,
ये बिल्कुल सच है 

कि अभी-अभी 
आपको 
बिल्कुल इनसानों जैसी 
छींक आयी l 


कवि - उदय प्रकाश  
किताब - उदय प्रकाश : पचास कविताएँ, नयी सदी के लिए चयन 
प्रकाशक - वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2012

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