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शनिवार, 14 मार्च 2015

केवल मेरा दुख (Kewal mera dukh by Sanjay Shandilya)


सबका दुख है 
मेरा दुख
बहुत घनेरा दुख

मेरा दुख तो 
मेरा दुख
केवल मेरा दुख l


कवि - संजय शांडिल्य 
संकलन - उदय-वेला 
प्रकाशक - प्रकाशन संस्थान, दिल्ली, 2014 

शनिवार, 9 मार्च 2013

क्यों (Kyon by Sanjay Shandilya)

दुबारा जीवन मिले
तो दादी
दादी होना नहीं चाहती

माँ
माँ होना

बीवी भी नहीं चाहती
बीवी होना

बहन नहीं होना चाहती
बहन

बेटी होना
बेटी नहीं चाहती

जीवन के
रेगिस्तानों में
फँसी हुई हैं वे ...

हजार बार भी मिले जीवन
तो मैं
क्यों होना चाहता हूँ
संजय शांडिल्य ?



कवि - संजय शांडिल्य
संकलन - जनपद : विशिष्ट कवि 
संपादक - नन्दकिशोर नवल, संजय शांडिल्य
प्रकाशक - प्रकाशन संस्थान, दिल्ली, 2006

बुधवार, 1 अगस्त 2012

ताला (Tala by Sanjay Shandilya)



कितना परेशान करता है यह ताला 

जब बन्द करो
बन्द नहीं होगा

खोलो हड़बड़ी में
खुलेगा नहीं
पसीना छुड़ा देगा सबके सामने

एकदम बच्चा हो गया है यह ताला 

कभी अकारण अनछुए ही
खुल जाएगा ऐसे
साफ़ हुआ हो जैसे
कोई जाला...मन का काला !


कवि - संजय शांडिल्य
संकलन - जनपद : विशिष्ट कवि 
संपादक - नन्दकिशोर नवल, संजय शांडिल्य
प्रकाशक - प्रकाशन संस्थान, दिल्ली, 2006