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गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

मुझे अपने बूट दो (Mourid Barghouti's poem 'Give me your boots' translated into Hindi)


मुझे अपने बूट दो
मुझे अपनी बेल्ट दो
मुझे अपना ख़ाली फ़्लास्क दो
मुझे पसीने से लथपथ अपने मोज़े दो
अपनी प्रेमिका को लिखे अपने ख़त का बाक़ी आधा पेज दो
मुझे लाल से भीगे अपने कपड़े दो
मुझे अपनी पिघली हुई मशीन गन दो
मुझे पानी आख़िरी नज़र दो, तुम्हारे आख़िरी शुबहे दो
तुम्हारी हिम्मत, तुम्हारा अनिश्चय, तुम्हारे अफ़सोस,
भाग निकलने की तुम्हारी क्षणिक इच्छा,
टिके रहने का तुम्हारा फ़ैसला,
दो मुझे तुम्हारी कंपकपाहट जब जहाज़ निशाना बनाता है तुम्हारे जिगरी को
दो मुझे तुम्हारे आँसू जो अनदेखे रह गए
दो मुझे शरणार्थी शिविर का अपना पता
मैं खोजूँगा बचे हुए मकान
बचे हुए लोग
तुम्हारे परिवार के बाक़ी लोग
मैं उन्हें बताऊँगा कि तुम कितने अकेले थे
मैं उनसे तुम्हारे बारे में बात करूँगा
मैं उन्हें तुम्हारा आसरा सामान दूँगा
अगर वे क़त्लेआम में मारे नहीं गए हों

मृत शरीरों का ढेर
दिलों का ढेर
मलबे का ढेर
आकांक्षाओं का ढेर
गर्द का ढेर
सपनों का ढेर
जलकर राख हुई औरतों, बच्चों, बूढ़ों का ढेर
उस घोड़े की मृत देह जो पानी पीने की कोशिश कर रहा था,
छतों का ढेर,
खो गए पुराने रिश्तेदारों का ढेर
बच्चों की चड्ढियों का ढेर
इस मलबे में बच्चे की देह कहाँ है?

माँ कहाँ है
जिसने उसका नाम चुना, उसके पहले हफ़्ते का जन्मदिन मनाया
और उसे अपने दूध से चुप कराया?
रसोई के बर्तनों का ढेर

ख़ाक कर दी गई ख़ुशियों का ढेर
निर्माण के लिए लोहे की छड़ें
पिछवाड़े में एक सैंडल
वह औरत कहाँ है जिसने इसका साइज़, रंग और डिज़ाइन तय किया था
दुकान दुकान मोलभाव करके?
वह अहाते में गिरी और उसकी सैंडल आसमान की तरफ़ उछली ।
चीख़ों का एक ढेर
ख़ामोशी का एक ढेर
ढहे हुए मकानों का एक ढेर
कुर्सियों का एक ढेर
वह आदमी कहाँ है जिसने मेहमानों के लिए स्वागतभरी मुस्कुराहट के साथ दरवाज़ा खोला
और उन्हें खाने के बाद कॉफ़ी दी?
दवाओं का एक ढेर
वह नानी कहाँ है जो नातियों से पूछती थकती नहीं कि क्या वे रात के खाने के बाद ली जानेवाली दवाएँ हैं,
और हमेशा उसे वही जवाब मिला:
"हाँ! नानी, ये वही हैं जो तुम खाने के बाद लेती हो"
जाली हुई कॉपियों का एक ढेर
खिलौनों का एक ढेर
थकान का एक ढेर
रोष का एक ढेर
खजूरों का एक ढेर
सब के सब अब
मौत की
खामोशी के बूटे वाली सफ़ेद चादर से ढँके हुए


फ़िलिस्तीनी कवि : मुरीद बरगूती
अरबी से अंग्रेज़ी: रदवा अशूर (Radwa Ashour)
हिंदी अनुवाद : अपूर्वानंद
स्रोत : Midnight and Other poems Arc Publications, UK,2008

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

खामोशी (Mourid Barghouti's poem translated into Hindi)



खामोशी ने कहा:
सच को वाग्मिता की ज़रूरत नहीं।
घुड़सवार की मौत के बाद
घर को मुख़ातिब घोड़ा
सब कुछ कह देता है
बिना कुछ कहे हुए।



फ़िलिस्तीनी कवि : मुरीद बरगूती
अरबी से अंग्रेज़ी: रदवा अशूर (Radwa Ashour)
हिंदी अनुवाद : अपूर्वानंद
स्रोत : Midnight and Other poems Arc Publications, UK,2008

सोमवार, 22 सितंबर 2025

छटपटाहट (Mourid Barghouti's poem 'Eagerness' translated into Hindi)



चौखट ने कहा:

काश! मैं हॉल में जा पाती।

हॉल ने कहा:

काश! मैं बाहर बालकनी में जा पाता।

बालकनी ने कहा:

काश! मैं उड़ पाती!


फ़िलिस्तीनी कवि : मुरीद बरगूती
अरबी से अंग्रेज़ी: रदवा अशूर (Radwa Ashour)
हिंदी अनुवाद : अपूर्वानंद
स्रोत : Midnight and Other poems Arc Publications, UK,2008

























गुरुवार, 18 सितंबर 2025

यह मेरा नसीब था बेथलहम में होना (Poem by Dareen Tatour translated into Hindi)


यह मेरा नसीब था बेथलहम में होना

- पूरब में ख़ासकर 

उन सड़कों पर चलना जिन्हें मैं नहीं जानती 

और दीवारों से पूछना  

बिलबोर्ड की 

कहानी के बारे में, 

मैं तस्वीर को देखती हूँ 

जो राज़फाश करती है 

और छिपे हुए घरों के प्रेतों को उघाड़ देती है

मैं बेचैन रही 

दो दिनों तक…और ज़्यादा नहीं 

बच्चों ने मुझे हर तरफ़ खींचा 

यह नाम …यह क्वार्टर 

आवाज़ और नग़मा   

और आधे ध्वस्त मकान 

छेददार छतें और जलावन 

मेरी देह की स्याही को जगा देते हैं …



फ़िलिस्तीनी कवयित्री  : दारीन तातूर

अरबी से अंग्रेज़ी: जोनाथन राइट  

हिंदी अनुवाद : अपूर्वानंद

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं
प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023

स्रोत : https://www.newarab.com/opinion/palestinian-woman-detained-israel-over-poem

 


रविवार, 7 सितंबर 2025

पीड़ित नं. 48 ((Mahmoud Darwish translated into Hindi)


वह मरा पड़ा था एक पत्थर पर।

उन्हें उसके सीने में मिला चाँद और एक गुलाबी लालटेन।

उन्हें उसकी जेब में मिले सिक्के।

एक माचिस की डिबिया और एक ट्रैवल परमिट।

उसकी बाँहों पर गुदने थे।

 

उसका भाई बड़ा हुआ

और शहर गया काम खोजने।

उसे जेल में डाल दिया गया

क्योंकि उसके पास ट्रैवल परमिट नहीं था।

वह सड़क पर एक डस्टबिन

और बक्से ले जा रहा था।

 

मेरे देश के बच्चो,

इस तरह चाँद की मौत हुई।



फ़िलिस्तीनी कवि : महमूद दरवेश 

अरबी से अंग्रेज़ी:  अब्दुल्लाह अल-उज़री 

हिंदी अनुवाद :  अशोक वाजपेयी

स्रोत : मॉडर्न पोइट्री ऑफ़ द अरब वर्ल्ड, पेंगुइन बुक्स, 1986 

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं
प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023




बुधवार, 20 मार्च 2024

इतनी सारी ख़ुशी (नाओमी शिहाब न्ये Naomi Shihab Nye)



मुश्किल है जान पाना कि क्या करें इतनी सारी ख़ुशी के साथ

दुख के साथ कुछ तो रहता है रगड़ने के लिए

मरहम और कपड़े से एक ज़ख़्म का ख़्याल रखना

जब आसपास की दुनिया गिर पड़े, तो उसके टुकड़े तुम्हें उठाने पड़ेंगे

अपने हाथों में पकड़ने के लिए कुछ…जैसे फाड़े गए टिकट या रेज़गारी।

पर ख़ुशी तैरती है।

उसे तुम्हारी ज़रूरत नहीं कि पकड़ और दबा कर रखो

उसे किसी बात की ज़रूरत नहीं।

ख़ुशी अगले मकान की छत पर चली जाती है गाती हुई

और ग़ायब हो जाती है, अगर चाहे तो।

तुम तो ऐसे भी खुश हो वैसे भी।

कि कभी तुम एक पेड़ पर बने शांत मकान में रहते थे

और अब शोर और धूल की खुली खदान के ऊपर

तुम्हें नाखुश नहीं कर सकती।

हर चीज़ की अपनी ज़िंदगी है

वह कॉफ़ी केक और पके आड़ुओं की संभावना के साथ जाग सकती है...

और उस फ़र्श से भी प्यार कर सकती है, जिसपर झाड़ू लगाई जानी है... दाग़दार कपड़ों और खरखराते रिकार्ड्स से भी

क्योंकि कोई भी जगह इतनी बड़ी नहीं कि

ख़ुशी को भर ले, तुम कंधे उचकाते हो,

हाथ फैलाते हो और वह तुमसे तैरती हुई निकल जाती है

हर उस चीज़ में जिसे तुम छूते हो,

उसके लिए तुम ज़िम्मेदार नहीं

कोई श्रेय तुम नहीं लेते, जैसे रात का आसमान श्रेय नहीं लेता

चाँद का, पर पकड़े रखता है और बाँटता रहता है

और इस तरह से जाना जाता है।



फ़िलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री : नाओमी शिहाब न्ये

मूल अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद: निधीश त्यागी

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं

प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023


सोमवार, 1 जनवरी 2024

आख़िरी बूँद तक ज़िंदगी (Mahmoud Darwish translated into Hindi)

अगर कोई मुझसे फिर कहे: “मान लो कि तुम कल मरनेवाले हो तो तुम क्या-क्या करोगे?” जवाब देने के लिए मुझे एकदम वक्त नहीं चाहिए होगा। अगर मैं उनींदा महसूस कर रहा होऊँ, मैं सो जाऊँगा। अगर मैं प्यासा होता, मैं पानी पीऊँगा। अगर मैं लिख रहा होता, तो जो लिख रहा होता उसे पसंद करता और सवाल को नज़रअंदाज़ कर देता। अगर मैं ख़ाना खा रहा होता तो मैं ग्रिल्ड मीट की स्लाइस पर थोड़ी सरसों और गोलमिर्च मिलाता। अगर मैं दाढ़ी बना रहा होता, हो सकता है मैं अपने कान की लौ काट लेता। अगर मैं अपनी महबूबा को चूम रहा होता, मैं उसके होठों को खा जाता मानो वे अंजीर हों। अगर मैं पढ़ रहा होता, मैं कुछ पृष्ठ छोड़ देता। अगर मैं प्याज़ छील रहा होता, मैं कुछ आँसू गिराता। अगर मैं चल रहा होता, मैं चलता ही रहता कुछ मंद चाल से। अगर मैं ज़िंदा होता, जैसा मैं अभी हूँ, तो मैं ज़िंदा न होने के बारे में कुछ न सोचता। अगर मैं न होता, तो सवाल मुझे परेशान ही न करता। अगर मैं मोत्ज़ार्ट को सुन रहा होता तो मैं फ़रिश्तों की दुनिया के आसपास होता। अगर मैं सो रहा होता, तो मैं सोता रहता और चैन से गार्डेनिया के सपने देखता रहता। अगर मैं हँस रहा होता, तो मैंने अपनी हँसी बीच में रोक दी होती इस सूचना के लिए सम्मान के चलते। और मैं कर भी क्या सकता था, अगर मैं बहादुर ही होता एक अहमक से अधिक और ताकतवर होता हरक्यूलियस से ज़्यादा?




फ़िलिस्तीनी कवि

अरबी से अंग्रेज़ी अनुवाद : कैथरीन कॉबम

हिंदी अनुवाद: अपूर्वानंद

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं

प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023

रविवार, 31 दिसंबर 2023

आख़िरी ट्रेन रुक गई है (Mahmoud Darwish translated into Hindi)


आख़िरी ट्रेन आख़िरी प्लेटफ़ॉर्म पर रुक गई है। वहाँ कोई नहीं है

गुलाबों को बचाने के लिए, कोई कबूतर नहीं शब्दों से तामीर की गई औरत पर उतरने के लिए।

वक्त ख़त्म हो चुका है। गाना बेहतर नहीं है झाग के मुक़ाबले।

हमारी ट्रेनों पर भरोसा मत करो, प्यारे। भीड़ में किसी का भी इंतज़ार मत करो।

आख़िरी ट्रेन रुक गई है आख़िरी प्लेटफ़ॉर्म पर। लेकिन कोई भी

नारसीसस की छाया नहीं डाल सकता वापस रात के आईनों में।

मैं कहाँ लिख सकता हूँ देह के अवतार का अपना सबसे ताज़ा वृत्तांत?

यह अंत है उसका जिसका अंत होना ही था। वह कहाँ है जिसका अंत होता है?

मैं कहाँ ख़ुद को अपनी देह में अपने वतन से आज़ाद कर सकता हूँ?

हमारी ट्रेनों पर भरोसा मत करो, प्यारे! आख़िरी कबूतर उड़ गया है।

आख़िरी ट्रेन आख़िरी प्लेटफार्म पर रुक गई है। और वहाँ कोई नहीं था।




फ़िलिस्तीनी कवि : ग़स्सान ज़क़तान

अरबी से अंग्रेज़ी: मुनुर अकाश और कैरोलिन फ़ॉश

हिंदी में : अपूर्वानंद

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं

प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023











शनिवार, 30 दिसंबर 2023

रूमाल (Ghassan Zaqtan translated into Hindi)


हमारे बीच कहने को कुछ न बचा

सब उस ट्रेन में चला गया जिसने अपनी सीटी

उस धुएँ में छुपा ली जो बादल न बन सका

उस चले जाने में जिसने तुम्हारे हाथ पाँव बटोरा किए

कुछ भी नहीं बचा कहने को हमारे बीच

इसलिए रहने देते हैं तुम्हारी मौत को

चमकती चाँदी की गहरी कौंध

और रहने देते हैं उन शहरों के सूरज को

तुम्हारे कंधों पर रखे गुलाब

के अक्स में।




फ़िलिस्तीनी कवि : ग़स्सान ज़क़तान

अरबी से अंग्रेज़ी: फ़ादी जूदा

हिंदी में : निधीश त्यागी

संकलन : कविता का काम आँसू पोंछना नहीं

प्रकाशन : जिल्द बुक्स, दिल्ली, 2023




गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

कविता का काम आँसू पोंछना नहीं है ('It is not poetry’s job to wipe away tears by Zakaria Mohammed Translated into Hindi)



वह रो रहा था, इसलिए उसे सँभालने के लिए मैंने उसका हाथ थामा और आँसू पोंछने के लिए

मैंने उसे कहा जब दुख से मेरा गला रुँध रहा था: मैं तुमसे वादा करता हूँ कि इंसाफ़

जीतेगा आख़िरकार, और अमन जल्दी ही क़ायम होगा।

ज़ाहिर है मैं उससे झूठ बोल रहा था। मुझे पता था कि इंसाफ़ नहीं मिलने वाला

और अमन जल्द नहीं आने वाला, पर मुझे उसके आँसू रोकने थे।

मेरी यह समझ ग़लत थी कि अगर हम किसी चमत्कार से

आँसुओं की नदी को रोक लें, तो सब कुछ ठीक ठाक तरह से चल निकलेगा।

फिर चीज़ों को हम वैसे ही मान लेंगे जैसी वे हैं। क्रूरता और इंसाफ़ एक साथ मैदान में

घास चरेंगे, ईश्वर शैतान का भाई निकलेगा, और शिकार हत्यारे का प्रेमी होगा।

पर आँसू रोकने का कोई तरीक़ा नहीं है। वे बाढ़ की तरह लगातार बहे जाते हैं और अमन की

रवायतों को तबाह कर देते हैं।

और इसलिए, आँसुओं की इस कसैली ज़िद की ख़ातिर, आइए, आँखों का अभिषेक करें

इस धरती के सबसे पवित्र संत के रूप में।

कविता का काम नहीं है आँसू पोंछना।

कविता को खाई खोदनी चाहिए जिसका बाँध वे तोड़ दें और इस ब्रह्मांड को डुबा दें।




फ़िलिस्तीनी कवि : ज़करिया मोहम्मद

अरबी से अंग्रेज़ी : लीना तुफ़्फ़ाहा

हिंदी अनुवाद : निधीश त्यागी और अपूर्वानंद

संकलन : कविता काम आँसू पोंछना नहीं

प्रकाशन : जिल्द प्रकाशन, दिल्ली, 2023

भजन (Mahmoud Darwish translated into Hindi)


जिस दिन मेरी कविताएँ मिट्टी से बनी थीं  

मैं अनाज का दोस्त था।


जब मेरी कविताएँ शहद हो गईं 

मक्खियाँ बस गईं 

मेरे होठों पर।



 

फ़िलिस्तीनी कवि : महमूद दरवेश

अरबी से अंग्रेज़ी:  अब्दुल्लाह अल-उज़री 

हिंदी अनुवाद  :  अशोक वाजपेयी

संकलन : 'कविता का काम आँसू पोंछना नहीं' में मूल मॉडर्न पोइट्री ऑफ़ द अरब वर्ल्ड, पेंगुइन बुक्स, 1986 से

प्रकाशन - जिल्द बुक्स, 2023


रविवार, 8 अक्टूबर 2023

काफ़ी है मेरे लिए (Enough for Me by Fadwa Tuqan, Hindi translation by Apoorvanand)

काफ़ी है मेरे लिए

काफ़ी है उसकी ज़मीन पर मरना

उसमें दफ़्न होना

घुलना और ग़ायब हो जाना उसकी मिट्टी में

और फिर खिल पड़ना एक फूल की शक्ल में

जिससे एक बच्चा खेले मेरे वतन का।

काफ़ी है मेरे लिए रहना

अपने मुल्क के आग़ोश में

उसमें रहना करीब मुट्ठी भर मिट्टी की तरह

घास के एक गुच्छे की तरह

एक फूल की तरह।




फ़िलिस्तीनी कवयित्री - फ़दवा तुक़ान (Fadwa Tuqan, 1917-2003)

स्रोत - https://www.milleworld.com/palestinian-poems-resistance/

अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद - अपूर्वानंद

रविवार, 19 मार्च 2023

चीज़ें और हम (by Mahmoud Darwish, translated into Hindi)

हम चीज़ों के मेहमान थे, उनमें से ज़्यादातर को 
हमसे कम परवाह है जब हम उन्हें छोड़ते हैं 

एक मुसाफ़िर विलाप करता है,और नदी उस पर हँसती है 
गुज़र जाओ, क्योंकि कोई नदी तक़रीबन वैसी ही होती है आरंभ में जैसी वह अंत में होती है 

कुछ भी इंतज़ार नहीं करता, चीज़ें उदासीन हैं 
हमारे प्रति, हम उनका अभिनंदन करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं 

लेकिन चूँकि हम उन्हें कहते हैं अपनी भावना 
हम नाम में यक़ीन करते हैं। क्या उनकी असलियत है उनके नाम में? 

हम चीज़ों के मेहमान हैं, हममें से अधिकतर 
अपनी शुरुआती भावनाएँ भूल जाते हैं, और उनसे इन्कार करते हैं। 


फ़िलिस्तीनी कवि - महमूद दरवेश 
संकलन - A River Dies Of Thirst 
अरबी से अंग्रेज़ी अनुवाद - कैथरीन कॉबम (Katherine Cobham) 
अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद - अपूर्वानंद

मंगलवार, 3 जनवरी 2023

यात्रा (The Journey by Mary Oliver translated from English)

एक दिन आख़िरकार तुम जान ही गए कि तुम्हें क्या करना है 

और तुमने शुरू किया

हालाँकि तुम्हारे चारों ओर

चीखती हुई आवाज़ें देती रहीं बदसलाह 

पूरा घर 

डगमगाने लगा

और तुमने कुहनियों पर महसूस की पहचानी हुई टहोक

“मेरी ज़िंदगी को ठीक करो”

हर आवाज़ चीखती रही।

लेकिन तुम नहीं रुके।

तुम्हें मालूम था कि तुम्हें क्या करना है 

हालाँकि हवाएँ अपनी सख़्त उँगलियों से 

बुनियाद टटोल रही थीं

हालाँकि भीषण था उनका विषाद 

पहले ही काफ़ी देर हो चुकी थी, और तूफ़ानी रात थी 

और सड़क गिरी हुई शाखाओं और पत्थरों से अटी

लेकिन धीरे धीरे जैसे तुमने उनकी आवाज़ों को पीछे छोड़ा

तारे बादलों के पर्दों के पीछे से 

प्रज्ज्वलित होने लगे 

और एक नई आवाज़ 

जिसे तुमने धीरे धीरे अपनी पहचाना अपनी आवाज़ 

जिसने तुम्हारा साथ दिया 

जैसे जैसे तुम गहरे और गहरे 

उतरते गए इस दुनिया में 

वह करने को बज़िद 

जो तुम ही कर सकते थे 

बज़िद बचाने को वह एक जान 

जो तुम ही बचा सकते थे।


अमेरिकी कवयित्री - मेरी ओलिवर (10.9.1935 – 17.1.2019) 

अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद - अपूर्वानंद 

स्रोत - http://www.phys.unm.edu/~tw/fas/yits/archive/oliver_thejourney.html

http://thepracticelondon.org/poetry/poems-of-transformation-the-journey-by-mary-oliver/#:~:text=%E2%80%93Mary%20Oliver,reflection%20of%20your%20own%20story.



शनिवार, 20 अगस्त 2022

जो बचा रह गया (The Survivor by Tadeusz Różewicz In Hindi)


मैं चौबीस का हूँ
क़त्ल को ले जाया गया
मैं बच गया।

जो आगे दिए जा रहे हैं वे खाली (अर्थहीन) पर्यायवाची हैं:
मनुष्य और पशु
प्रेम और घृणा
मित्र और शत्रु
अंधकार और प्रकाश।

मनुष्यों और पशुओं को मारने का तरीक़ा एक ही है
मैंने यह देखा है:
ट्रक काट डाले गए आदमियों से ठुँसे हुए
जो बचाए नहीं जाएँगे।

विचार मात्र शब्द हैं:
भलाई और अपराध
सच और झूठ
सुंदरता और कुरूपता
साहस और कायरता।

भलाई और अपराध एक ही बराबर हैं
मैंने यह देखा है:
उस आदमी में जो दोनों ही था
अपराधी और भला।

मैं खोज रहा हूँ एक अध्यापक और गुरु
काश वह मेरी दृष्टि सुनने की ताक़त और वाणी बहाल कर दे वापस
काश वह फिर से नाम दे वस्तुओं और विचारों को
काश वह अलग करे अंधकार को प्रकाश से।

मैं चौबीस का हूँ
क़त्ल को ले जाया गया
मैं बच गया।



पोलिश कवि - तादयूश रुज़ेविच
संग्रह - 'होलोकास्ट पोएट्री'
संकलन और प्रस्तावना - हिल्डा शिफ़
पोलिश से अंग्रेज़ी अनुवाद - ऐडम ज़ेर्निआव्स्की
प्रकाशक - सेंट मार्टिन्स ग्रिफिन, 1995
अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद - अपूर्वानंद

सोमवार, 11 जुलाई 2022

यह क़ब्रिस्तान है (THIS IS A CEMETERY BY OLAF D. EYBE)

वह नन्हीं स्वीडिश लड़की

फूल चुन रही है

ऊँची घास में

बिरकेनाऊ कैम्प की

में उसे ऐसा करने से रोकना चाहता हूँ

यह क़ब्रिस्तान है

लेकिन मैं ख़ामोश रह जाता हूँ

यह क़ब्रिस्तान है

 

मैं क्या कहूँ उस अमरीकी से

जो अभी अभी पहुँचा है ऑश्वित्ज़ से

बिरकेनाऊ में और पूछ रहा है

क्या यह ऑश्वित्ज़ है?

मैं सोचता हूँ कि क्या उसे मालूम है

मित्र देशों को मालूम था एकदम शुरू में ही

लेकिन उन्होंने इसके बारे में कुछ नहीं किया

यह क़ब्रिस्तान है 


 

जर्मन कवि - OLAF D. EYBE (1963-2021)

जर्मन भाषा से अंग्रेज़ी अनुवाद - क्रिस्टोफ़र मुलर

अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद - अपूर्वानंद 

संग्रह  - The Auschwitz Poems 

संकलन और संपादन - Adam A. Zych

प्रकाशन - THE AUSCHWITZ-BIRKENAU STATE MUSEUM, 1999


द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी के नियंत्रण वाले पोलैंड में ऑश्वित्ज़ नाज़ियों का बनाया यातना शिविर और क़त्लगाह था। उसके अनेकानेक यातना शिविरों में से बिरकेनाऊ सबसे अधिक बड़ा और कुख्यात था। 

सोमवार, 27 जून 2022

विदूषक (Clowns by Miroslav Holub translated in Hindi)


विदूषक कहाँ जाते हैं?

विदूषक कहाँ सोते हैं?

विदूषक क्या खाते हैं?

विदूषक क्या करते हैं
जब कोई नहीं
कोई नहीं क़तई
हँसता है अब और 

अम्माँ?

चेक कवि - मिरोस्लाव होलुब, 1961
संग्रह - पोएम्स : बिफोर एंड आफ्टर
चेक से अंग्रेज़ी अनुवाद - एवाल्ड (Ewald Osers)
प्रकाशन - ब्लडैक्स बुक्स, ग्रेट ब्रिटेन, 1990
अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद - अपूर्वानंद

सोमवार, 20 जून 2022

लुकाछिपी (Hide-And-seek by Vasko Popa translated in Hindi)


कोई किसी और से छिपता है
छिपता है अपनी जीभ के नीचे
और दूसरा खोजता है उसे ज़मीन के नीचे

वह अपने ललाट में छिपता है
वह दूसरा खोजता है उसे आसमान में

वह छिपता है अपनी विस्मृति में
वह दूसरा खोजता है उसे घास में

खोजता है उसे खोजता है
कोई जगह नहीं जहाँ वह उसे नहीं खोजता
और खोजते हुए ख़ुद को खो देता है



सर्बियाई कवि वास्को पोपा (29.6.22 - 5.6.91)
स्रोत : https://mypoeticside.com/poets/vasko-popa-poems
अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद : अपूर्वानंद 


मैक्सिको के नामी कवि ऑक्टोवियो पाज़ ने पोपा के बारे में कहा था - कवियों के पास हुनर है कि वे दूसरों के लिए बोलते हैं, मगर पोपा की नायाब खासियत यह है कि वे दूसरों की सुनते हैं। 

रविवार, 19 जून 2022

जीना 2 (On Living by Nazim Hikmet, translated In Hindi)


मान लें कि हम सख़्त बीमार हैं, हमें ज़रूरत है सर्जरी की -

जिसका मतलब यह है कि मुमकिन है कि हम उतर न पाएँ

                                 उस उजली मेज़ से।

हालाँकि नामुमकिन है उदासी न महसूस करना

                   सोचकर कुछ जल्दी जाने के ख़याल से,

फिर भी हम हँसेंगे चुटकुलों पर,

हम खिड़की के बाहर देखेंगे जानने को कि बारिश हो रही है -

और बेचैनी से इंतज़ार करेंगे

                   सबसे ताज़ा ख़बर का .. .

मान लें कि हम मोर्चे पर हैं -

         ऐसी जंग के लिए जो लड़ने लायक है और मान लो

वहाँ, उस पहले हमले में, पहले ही दिन

         हम अपने मुँह के बल गिर पड़ें, मृत।

हम इसे जानेंगे एक विचित्र क्रोध के साथ,

         फिर भी हम फ़िक्र में मरते रहेंगे

         जंग के नतीजों को लेकर, जो हो सकता है सालो साल चले।

मान लें कि हम जेल में हैं

और पचास के क़रीब हैं

और मान लो हमारे पास हैं और अठारह साल ,

          इसके पहले कि लोहे के फाटक खुलें,

फिर भी हम रहेंगे उस बाहर के साथ,

उसके लोगों और जानवरों, जद्दोजहद

और हवा के साथ

          मेरा मतलब है बाहर के साथ दीवारों के पार 

मेरा मतलब है जैसे भी और जहाँ भी हम हैं

          हमें जीना ही चाहिए मानो कि हम कभी नहीं मरेंगे।

 

तुर्की कवि नाज़िम हिकमत (1902-1963)

स्रोत : /poets.org/poem/living

मूल संकलन : Poems of Nazim Hikmet

तुर्की से अंग्रेज़ी अनुवाद : Randy Blasing and Mutlu Konuk

प्रकाशन : Persea Books

अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद : अपूर्वानंद



आज पूरे 10 साल हुए मनमाफ़िक शुरू किए हुए। 19 जून की दोपहर अनाड़ी की तरह ब्लॉग शुरू किया था अपने दोस्त कब्बू से पूछ-पूछ कर। पहले दो दिन तो ब्लॉग सिर्फ मुझे दिख रहा था। कब्बू से अपनी परेशानी बताई तो उसने सेटिंग में जाकर सर्च इंजन के सामने ला दिया था। उसके बाद मज़ा दुगुना-तिगुना-चौगुना बढ़ता गया। नशे-सा। फिर बीच में मेरा उत्साह जाता रहा कई वजहों से। मनमाफ़िक न कविता मिलती थी, न मन था। इसके बावजूद ब्लॉग ने ही मुझे कुछ-कुछ लिखने की जगह दी जो न कविता है न कहानी।

अब ब्लॉग पर वापस आई हूँ और उम्मीद कर रही हूँ कि इसकी रफ़्तार बनाए रखूँ। आज चंडीगढ़ से आते हुए ट्रेन में अपूर्वानंद ने मनमाफ़िक के लिए अनुवाद किया। इंटरनेट की गति के कारण मुश्किल पेश आई तो अनुवाद की फ़ोटो भेजी और तब उसे टाइप किया मैंने। फ़ॉण्ट और फ़ॉर्मैटिंग की समस्या ने उलझा रखा था, मगर कविता इतनी प्यारी है कि मन आनंदित है।

शुक्रवार, 17 जून 2022

जीना 1 (On Living by Nazim Hikmet, translated In Hindi)

 

1.   जीना कोई हँसी-खेल नहीं

    तुम्हें पूरी गंभीरता से जीना चाहिए

        उदाहरण के लिए, एक गिलहरी की तरह

मेरा मतलब है जीने के आगे और ऊपर किसी चीज़ की उम्मीद के बग़ैर,

     मेरा मतलब है जीना ही तुम्हारा पूरा काम होना चाहिए

 

जीना कोई हँसी-खेल नहीं

     तुम्हें इसे गंभीरता से लेना चाहिए,

         इतना और इतनी हद तक कि

जैसे तुम्हारे हाथ बँधे हों तुम्हारी पीठ के पीछे,

                        और तुम्हारी पीठ लगी हो दीवार से

या फिर किसी प्रयोगशाला में,

  अपने सफ़ेद कोट और सुरक्षा कवच में

  तुम मर सकते हो लोगों के लिए -

यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जिनके चेहरे तुमने कभी नहीं देखे

हालाँकि तुम जानते हो कि जीना

सबसे असल, सबसे सुंदर चीज़ है।

 

मेरा मतलब है तुम्हें जीने को इतनी गंभीरता से लेना चाहिए

  कि सत्तर की उम्र में भी, उदाहरण के लिए, तुम ज़ैतून के दरख़्त लगाओगे

  अपने बच्चों के लिए नहीं क़तई

बल्कि इसलिए कि हालाँकि तुम डरते हो मृत्यु से तुम उसपर यक़ीन नहीं करते

क्योंकि जीना, मेरा मतलब है अधिक वज़नी ठहरता है।


तुर्की कवि नाज़िम हिकमत (1902-1963) 

स्रोत : /poets.org/poem/living

मूल संकलन : Poems of Nazim Hikmet

तुर्की से अंग्रेज़ी अनुवाद : Randy Blasing and Mutlu Konuk

प्रकाशन : Persea Books


अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद : अपूर्वानंद




इस खूबसूरत कविता के एक अंश का अनुवाद करके थोड़ी देर पहले अपूर्व ने चंडीगढ़ से भेजा। यात्रा और दसियों काम के बाद देर रात इस कविता ने कितना सुकून दिया होगा, इसका अंदाजा लगा सकती हूँ। मारने-मरने, उजाड़ने की खबरों के बीच,  रोज़ाना की आपाधापी, निराशा और उदासी के बीच यह ज़िंदगी में लौटने का न्यौता है।  
और मुझे याद आई पटना के दिनों की। 1983-85 के दौरान कितनी बार हम कई दोस्त लोग रात-रात भर कविता-पोस्टर बनाया करते थे। अधिकतर प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यक्रम के लिए। उन्हीं दिनों नाज़िम हिकमत, महमूद दरवेश, ब्रेख्त, नेरुदा, काजी नजरुल इस्लाम,मायकोव्स्की आदि के साहित्य से परिचय हुआ था। उस कतार में कवयित्रियाँ बाद में आईं। इस पर ध्यान भी काफी बाद में गया।