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सोमवार, 17 सितंबर 2018

खेल (Khel by Maithilisharan Gupt)

ध्यान न था कि राह में क्या है,
काँटा कंकर ढोंका ढेला,
                     तू भागा मैं चला पकड़ने
                     तू मुझसे मैं तुझसे खेला I

सुरभित शीतल ब्यार बही थी,
चारु चन्द्रिका छिटक रही थी,
रजतमयी-सी मुदित मही थी,
                     रत्नाकर लेता था हेला,
                     तू मुझसे मैं तुझसे खेला I

अब पकड़ा, अब पकड़ा पल में,
मैं पीछे-पीछे दौड़ा जल-थल में,
आ आकर के भी कौशल में,
                      हाथ न आया तू अलबेला,
                      तू मुझसे मैं तुझसे खेला I

यदि तू कभी हाथ भी आया,
तो छूने पर निकली छाया,
हे भगवन् ! यह कैसी माया,
                       इतना कष्ट व्यर्थ ही झेला,
                       तू मुझसे मैं तुझसे खेला I


कवि - मैथिलीशरण गुप्त
संकलन - मैथिलीशरण गुप्त ग्रंथावली, खंड 4
संपादन - कृष्णदत्त पालीवाल
प्रकाशन - वाणी प्रकाशन, 2008

शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

गंगा (Ganga by Maithilisharan Gupt)


यह 'घट' इतना कहाँ हाय ! जो इसमें रहती गंगा 
मुझे हाथ धोने का अवसर दे तू, बहती गंगा I

देखे हैं कितने 'युग' तूने क्या कहती है गंगा
तुझसे बुझती रहे चिता वह, जो दहती है गंगा

आज हमारे पाप-ताप ही तू सहती है गंगा
'फूल' भेंट के साथ बाँह यह तू गहती है गंगा

बहती रह इस महा मही पर मेरी महती गंगा
मुझे हाथ धोने का अवसर दे तू, बहती गंगा I


कवि - मैथिलीशरण गुप्त 
संकलन - स्वस्ति और संकेत 
प्रकाशक - साकेत प्रकाशन, चिरगाँव, झाँसी, 1983

गुरुवार, 16 मई 2013

लत्ते उड़ जायेंगे (Latte ud jayeinge by Maithilisharan Gupt)


तड़क भड़क और कड़क मिटेगी सब 
गर्व और गौरव सभी ये गुड़ जायेंगे 
गाज न गिराओ ओ घमण्डी घनो, मानो कहा 
काले मुँह आप ही तुम्हारे मुड़ जायेंगे 
मातृमूर्ति मेदिनी को सीधे जलदान करो 
झोंके झूम झंझा के जहाँ वे जुड़ जायेंगे 
पत्ते उड़ जायेंगे तुम्हारे घटाडम्बर के 
याद रक्खो अम्बर के लत्ते उड़ जायेंगे !



कवि - मैथिलीशरण गुप्त 
संकलन - स्वस्ति और संकेत 
प्रकाशक - साकेत प्रकाशन, चिरगाँव, झाँसी, 1983

रविवार, 7 अप्रैल 2013

मिट्टी (Mittee by Mathilisharan Gupt)


        मिट्टी, तेरा क्या मोल ?
पड़ी है सबके पैरों तले 
उगाये तूने जो अंकुर भले 
        उन पर क्या वारूँ, बोल !



कवि - मैथिलीशरण गुप्त 
संकलन - स्वस्ति और संकेत 
प्रकाशक - साकेत प्रकाशन, चिरगाँव, झाँसी, द्वितीय संस्करण - 1983