कितना साधारण सा शब्द
है पहचानना। बहुप्रयुक्त भी। उठते-बैठते यह हमारी ज़बान से ऐसे निकलता है जैसे अनायास
हो जानेवाली क्रिया हो। लेकिन ऐसा है क्या ?
नहीं है। लोग यह जानते
हैं कि पहचानना मुश्किल होता है। यह एक ऐसी क्रिया है जिसमें अक्सर लोग विफल होते हैं,
जिसके लिए उन्हें लगभग पूरा जीवन खपा देना पड़ता
है। यह आता है अभ्यास से या कहना चाहिए विफलता से सबक सीखने के बाद। यहाँ मुझे मीडिया
में लंबे समय से काम कर रहे अपने एक दोस्त राकेश शुक्ला की बात याद आ गई। मेरे दोस्त
ने बड़ी अच्छी बात कही थी कि अच्छा निर्णय आता है अनुभव से और अनुभव आता है बुरे निर्णय
लेने के कारण हासिल विफलता से।