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रविवार, 19 मार्च 2023
चीज़ें और हम (by Mahmoud Darwish, translated into Hindi)
मंगलवार, 3 जनवरी 2023
यात्रा (The Journey by Mary Oliver translated from English)
एक दिन आख़िरकार तुम जान ही गए कि तुम्हें क्या करना है
और तुमने शुरू किया
हालाँकि तुम्हारे चारों ओर
चीखती हुई आवाज़ें देती रहीं बदसलाह
पूरा घर
डगमगाने लगा
और तुमने कुहनियों पर महसूस की पहचानी हुई टहोक
“मेरी ज़िंदगी को ठीक करो”
हर आवाज़ चीखती रही।
लेकिन तुम नहीं रुके।
तुम्हें मालूम था कि तुम्हें क्या करना है
हालाँकि हवाएँ अपनी सख़्त उँगलियों से
बुनियाद टटोल रही थीं
हालाँकि भीषण था उनका विषाद
पहले ही काफ़ी देर हो चुकी थी, और तूफ़ानी रात थी
और सड़क गिरी हुई शाखाओं और पत्थरों से अटी
लेकिन धीरे धीरे जैसे तुमने उनकी आवाज़ों को पीछे छोड़ा
तारे बादलों के पर्दों के पीछे से
प्रज्ज्वलित होने लगे
और एक नई आवाज़
जिसे तुमने धीरे धीरे अपनी पहचाना अपनी आवाज़
जिसने तुम्हारा साथ दिया
जैसे जैसे तुम गहरे और गहरे
उतरते गए इस दुनिया में
वह करने को बज़िद
जो तुम ही कर सकते थे
बज़िद बचाने को वह एक जान
जो तुम ही बचा सकते थे।
अमेरिकी कवयित्री - मेरी ओलिवर (10.9.1935 – 17.1.2019)
अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद - अपूर्वानंद
स्रोत - http://www.phys.unm.edu/~tw/
http://thepracticelondon.org/poetry/poems-of-transformation-the-journey-by-mary-oliver/#:~:text=%E2%80%93Mary%20Oliver,reflection%20of%20your%20own%20story.
मंगलवार, 1 नवंबर 2022
रोज शाम को (Roj shaam ko by Ramgopal Sharma 'Rudra')
रोज शाम को मन थकान से भर जाता है !!
बस मरु ही मरु, आँख जहाँ तक जाए :
कोई छाँव नहीं कि जहाँ सुस्ताए :
उड़ता ही रह जाता है जो पंछी,
क्या लेकर अपने खोंते में आए !
रोज शाम को मन उफान से भर जाता है !!
रोज-रोज एक ही बात होती है -
रोज पाँख से आँख मात होती है!
लेकिन, इतनी दूर निकल जाता हूँ -
आते-आते साँझ रात होती है !
रोज शाम को मन उड़ान से भर जाता है !
- 1955
किताब - रुद्र समग्र
संपादक - नंदकिशोर नवल
प्रकाशक - राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली, 1991
बुधवार, 31 अगस्त 2022
ढलती हुई आधी रात (Dhalati hui aadhi raat by Firaq Gorakhpuri)
संकलन - उर्दू के लोकप्रिय शायर : फ़िराक़ गोरखपुरी
संपादक - प्रकाश पंडित
प्रकाशक - हिन्द पॉकेट बुक्स, दिल्ली, नवीन संस्करण 1994
शुक्रवार, 26 अगस्त 2022
धुरी पर (Dhuree par by Gyanendrapati)
धर्म की धुरी पर
घूम रही है पृथ्वी
मर्म की धुरी पर
जीवन की परिक्रमा कर रहा है कवि।
कवि - ज्ञानेन्द्रपति
संग्रह - कविता भविता
प्रकाशन - सेतु प्रकाशन, दिल्ली, 2020
गुरुवार, 25 अगस्त 2022
नारी ( Naari by Nagathihalli Ramesh translated from Kannada)
नारी ...
चुन लिया करती है बुरे से भले को
वह सब कुछ नहीं निगलती
जो भी मिलता है उसे तौलती है
परखती है तराशती है
लेकिन मर्द ? वह तो भोगी है
सबकुछ चाटनेवाला
किसी में न बाँटनेवाला
मर्द की इन्हीं ऐयाशी [भरी] आदतों के कारण
कई सभ्यताएँ उभरीं और डूब गयीं
कई राजपाट बने और ढह गये
दुनिया की छल-कपटों के बीच बैठी यह औरत
तसल्ली देती है मर्द के भरम, सपने [सपनों], उसूलों को
हाथ थामे रहती है अपनी आखरी [आखिरी] साँस तक
साथ-साथ चलती है सभ्यताओं से सभ्यताओं तक ...
कन्नड़ कवि - नागतिहल्ली रमेश
संग्रह - सागर और बारिश
हिन्दी अनुवाद - गिरीश जकापुरे
प्रकाशन - सृष्टि प्रकाशन, बंगलोर, 2015
काफी समय लगा इस कन्नड़ कवि की भाषा और लय को पकड़ने में। कई बार पढ़ा। बहुत अलग किस्म के अनुभव और अभिव्यक्तियाँ हैं। अनुवाद और किताब की सज्जा भी हिन्दी किताबों से भिन्न है। रसास्वादन के लिए रमना पड़ता है और मेहनत लगती है, यह इस बार भी महसूस हुआ। खोजकर और पढ़ना है नागतिहल्ली रमेश को तभी पूरा आनंद आएगा। अभी एक कविता इस संग्रह से जो सीधे सीधे अपनी बात कहती है और हम उत्तर भारतीयों के मन-मिजाज़ वाली भाषा में अनूदित है।
सोमवार, 22 अगस्त 2022
मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib in Hindi)
दिलज़ ताबे बला बिगुज़ाद-ओ-खूं कुन
ज़ि-दानिश का नक़शायद जुनूँ कुन
दिल को अपने
मुश्किलों की
आँच पर
पिघला के तुम
लोहू बना दो।
व्यर्थ शंकाएँ
कभी
दिल में न लाओ।
विवेक
और बुद्धि से जब
कुछ काम न निकले
तो फिर
दीवाने बन जाओ।
शायर - मिर्ज़ा ग़ालिब
मूल फ़ारसी से हिन्दी अनुवाद - सादिक़
संग्रह - चिराग़-ए-दैर, बनारस पर केन्द्रित कविताएँ
प्रकाशन - राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2018
रज़ा पुस्तक माला : कविता