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बुधवार, 15 मई 2013

गामा और लामा (Gama aur Lama by Rakesh Ranjan)


गामा आए गाम पर !

जन-गण जय-जयकार मचाते 
भारत-भाग्य-विधाता गाते 
पत्रकारगण धाते आते 
फोकस देते चाम पर !

लामा उतरे लाम पर ! 

हन-हन-हन हथियार चलाते  
विरोधियों के किले ढहाते 
ह्त्या करते, खून बहाते 
धरम-करम के नाम पर ! 

लहू दामनेदाम पर !
लहू दामनेबाम पर !
कवि-कोकिल-कुल चाय चुसकते 
कविता करते शाम पर ! 



कवि - राकेश रंजन
संकलन - अभी-अभी जनमा है कवि 
प्रकाशक - प्रकाशन संस्थान, दिल्ली, 2007

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